पॉलीग्राफ टेस्ट, जिसे आमतौर पर "ली डिटेक्टर टेस्ट" भी कहा जाता है, एक प्रकार का जांच प्रक्रिया है जिसका उपयोग यह जानने के लिए किया जाता है कि व्यक्ति झूठ बोल रहा है या सच। इस परीक्षण में विभिन्न प्रकार के शारीरिक प्रतिक्रियाओं जैसे कि दिल की धड़कन, रक्तचाप, और श्वास की गति को मापा जाता है। यह मापदंड झूठ बोलने पर व्यक्ति के शारीरिक प्रतिक्रियाओं में बदलाव को रिकॉर्ड करते हैं।
पॉलीग्राफ टेस्ट में, व्यक्ति को कुछ सवाल पूछे जाते हैं, और उसके बाद उसकी शारीरिक प्रतिक्रियाओं की निगरानी की जाती है। अगर व्यक्ति के जवाब देते समय शारीरिक प्रतिक्रियाओं में अत्यधिक बदलाव होता है, तो इसे एक संकेत माना जाता है कि व्यक्ति झूठ बोल सकता है। हालांकि, यह ध्यान देना महत्वपूर्ण है कि पॉलीग्राफ टेस्ट पूरी तरह से सटीक नहीं होता और इसके परिणामों को केवल एक संकेत के रूप में ही लिया जाना चाहिए।
किसी भी न्यायिक मामले में, पॉलीग्राफ टेस्ट का परिणाम आमतौर पर सबूत के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाता, लेकिन यह जांच एजेंसियों को संदिग्ध के साथ बातचीत के दौरान अतिरिक्त जानकारी प्रदान कर सकता है।