Mumbai:
मुंबई की एक विशेष अदालत ने शुक्रवार को वरिष्ठ राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री छगन भुजबल को महाराष्ट्र सदन निर्माण से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राहत देते हुए आरोपों से मुक्त कर दिया।
यह मामला नई दिल्ली स्थित महाराष्ट्र सदन के निर्माण से संबंधित था, जिसमें कथित तौर पर ठेके के आवंटन और लागत बढ़ाने को लेकर अनियमितताओं के आरोप लगाए गए थे। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दावा किया था कि निर्माण कार्य से जुड़े अनुबंधों के जरिए कथित रूप से रिश्वत और अवैध फंड फ्लो हुआ।
ईडी के अनुसार, वर्ष 2005–06 में दिए गए एक निर्माण ठेके की मूल लागत लगभग ₹13.5 करोड़ थी, जिसे बाद में बढ़ाकर लगभग ₹50 करोड़ कर दिया गया। एजेंसी ने आरोप लगाया था कि इस प्रक्रिया में कथित तौर पर अवैध लाभ अर्जित किया गया।
हालांकि, अदालत ने उपलब्ध रिकॉर्ड, दस्तावेज़ों और प्रस्तुत दलीलों के आधार पर छगन भुजबल को इस मामले में डिस्चार्ज (मुक्त) कर दिया। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को इस स्तर पर सिद्ध करने में असफल रहा।
गौरतलब है कि इससे पहले भी छगन भुजबल, उनके बेटे पंकज भुजबल और अन्य संबंधित व्यक्तियों को इस मामले में अलग-अलग चरणों पर कानूनी राहत मिल चुकी है।
यह आदेश महाराष्ट्र की राजनीति और लंबे समय से चल रहे इस मामले के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण कानूनी विकास माना जा रहा है।
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