Published: 7 August 2026
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते उपयोग पर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि AI न्यायपालिका की कार्यक्षमता बढ़ाने में मदद कर सकता है, लेकिन यह कभी भी इंसानी विवेक (Human Judgment) की जगह नहीं ले सकता। उन्होंने कहा कि तकनीक न्याय प्रणाली को अधिक तेज और प्रभावी बना सकती है, लेकिन अंतिम निर्णय हमेशा न्यायाधीश के अनुभव, संवेदनशीलता और कानूनी समझ पर आधारित होना चाहिए।
CJI का यह बयान ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर में अदालतों और सरकारी संस्थानों में AI के उपयोग पर तेजी से चर्चा हो रही है।
AI की भूमिका पर CJI की स्पष्ट राय
अपने संबोधन में CJI सूर्यकांत ने कहा कि AI का इस्तेमाल न्यायपालिका में कई कार्यों को आसान बना सकता है।
उन्होंने बताया कि AI की मदद से—
- केस मैनेजमेंट बेहतर हो सकता है।
- कानूनी दस्तावेजों की तेजी से समीक्षा की जा सकती है।
- रिसर्च और डेटा एनालिसिस आसान हो सकता है।
- लंबित मामलों के प्रबंधन में सहायता मिल सकती है।
हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि AI केवल एक सहायक तकनीक है, न्यायाधीश का विकल्प नहीं।
इंसानी विवेक क्यों है जरूरी?
CJI ने कहा कि हर मुकदमे की परिस्थितियां अलग होती हैं और कई मामलों में मानवीय संवेदनशीलता, नैतिकता और न्यायिक विवेक की आवश्यकता होती है।
उन्होंने कहा—
- कानून की व्याख्या केवल डेटा के आधार पर नहीं की जा सकती।
- कई फैसलों में सामाजिक और मानवीय पहलुओं को समझना जरूरी होता है।
- AI भावनाओं, परिस्थितियों और मानवीय मूल्यों का पूरी तरह आकलन नहीं कर सकता।
न्यायपालिका में AI का बढ़ता उपयोग
भारत सहित कई देशों में AI आधारित तकनीकों का उपयोग बढ़ रहा है।
इनका उपयोग मुख्य रूप से—
- केस सर्च
- दस्तावेज़ विश्लेषण
- कानूनी रिसर्च
- डेटा मैनेजमेंट
- न्यायिक प्रशासन
जैसे कार्यों में किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि AI न्यायपालिका की कार्यक्षमता बढ़ा सकता है, लेकिन अंतिम फैसला मानव न्यायाधीश द्वारा ही लिया जाना चाहिए।
विशेषज्ञों की राय
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि AI भविष्य में न्यायिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है, लेकिन इसके उपयोग के लिए स्पष्ट नियम और सुरक्षा मानक जरूरी होंगे।
उनका मानना है कि—
- AI न्याय प्रक्रिया को तेज बना सकता है।
- गलतियों की संभावना कम हो सकती है।
- लेकिन मानव निगरानी हमेशा आवश्यक रहेगी।
निष्कर्ष
CJI सूर्यकांत का बयान यह स्पष्ट करता है कि AI न्यायपालिका के लिए एक उपयोगी तकनीकी सहयोगी हो सकता है, लेकिन न्याय देने का अधिकार और जिम्मेदारी हमेशा इंसानी विवेक के पास ही रहेगी। तकनीक और मानव निर्णय के बीच संतुलन बनाए रखना भविष्य की न्याय प्रणाली के लिए सबसे महत्वपूर्ण होगा।
FAQs
Q1. CJI सूर्यकांत ने AI को लेकर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि AI न्यायपालिका की मदद कर सकता है, लेकिन इंसानी विवेक की जगह नहीं ले सकता।
Q2. न्यायपालिका में AI का उपयोग किन कार्यों में हो सकता है?
केस मैनेजमेंट, कानूनी रिसर्च, दस्तावेज़ विश्लेषण और डेटा प्रबंधन में।
Q3. क्या AI जज की जगह ले सकता है?
नहीं। CJI के अनुसार अंतिम निर्णय हमेशा न्यायाधीश द्वारा ही लिया जाना चाहिए।
Q4. AI के क्या फायदे हैं?
यह न्यायिक प्रक्रिया को तेज, व्यवस्थित और अधिक कुशल बना सकता है।
Q5. AI के उपयोग में सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
मानवीय संवेदनशीलता, नैतिकता और न्यायिक विवेक का विकल्प न होना।
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