Bengaluru PMLA Case: पूर्व आबकारी कर्मी और बेटी दोषी, 5 संपत्तियां जब्त करने का आदेश
Bengaluru PMLA Case: पूर्व आबकारी अधिकारी और बेटी दोषी, 5 संपत्तियां जब्त करने का आदेश
फैसला: 14 अक्टूबर 2026 | ED प्रेस विज्ञप्ति: 15 अक्टूबर 2026
Bengaluru PMLA Case में किसे कितनी सजा?
प्रवर्तन निदेशालय की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, बेंगलुरु की विशेष अदालत ने सेवानिवृत्त आबकारी कर्मी एम. रामचंद्र और उनकी बेटी आर. यूरेखा को मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में दोषी ठहराया। रामचंद्र को पांच वर्ष का कठोर कारावास और ₹5 लाख जुर्माना, जबकि यूरेखा को तीन वर्ष का कठोर कारावास और ₹3 लाख जुर्माना लगाया गया।
पांच अचल संपत्तियों की जब्ती का आदेश
ED के अनुसार, अदालत ने PMLA की धारा 8(5) के तहत पांच अचल संपत्तियां केंद्र सरकार के पक्ष में जब्त करने का आदेश दिया। विज्ञप्ति में बताया गया कि जांच के दौरान 2016 में आठ संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच की गई थीं।
2009 की लोकायुक्त FIR से शुरू हुआ मामला
मामले की शुरुआत कर्नाटक लोकायुक्त पुलिस की 7 जुलाई 2009 की FIR से हुई थी। ED ने अक्टूबर 2009 में अपना मामला दर्ज किया और जून 2016 में अभियोजन शिकायत दाखिल की। संबंधित भ्रष्टाचार मामले में रामचंद्र को नवंबर 2024 में भी दोषी ठहराया गया था।
बेटी की भूमिका पर अदालत का निष्कर्ष
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, अदालत ने पाया कि यूरेखा ने अपराध की आय से खरीदी गई संपत्ति अपने नाम रखने में जानबूझकर सहायता की थी। दोषसिद्धि PMLA की धाराओं 3 और 4 के तहत हुई।
गवाह के विरुद्ध अलग कार्यवाही का निर्देश
ED के मुताबिक, बचाव पक्ष के गवाह एम. जयराम की गवाही को लेकर अदालत ने प्रथमदृष्टया आधार पाते हुए धारा 340 CrPC के तहत झूठी गवाही का मामला दर्ज करने का निर्देश दिया। यह निर्देश उस गवाह की दोषसिद्धि के समान नहीं है।