Published: 24 जुलाई 2026
भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली। कारोबार के दौरान बीएसई सेंसेक्स 700 अंकों से अधिक टूट गया, जबकि एनएसई निफ्टी भी महत्वपूर्ण स्तरों से नीचे फिसल गया। बाजार में आई इस तेज गिरावट के चलते निवेशकों की कुल संपत्ति में लगभग ₹3 लाख करोड़ की कमी दर्ज की गई।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेत, विदेशी निवेशकों (FII) की बिकवाली, आईटी और बैंकिंग शेयरों में गिरावट तथा वैश्विक आर्थिक चिंताओं के कारण निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ। इसके चलते लगभग सभी प्रमुख सेकोरों में बिकवाली का दबाव देखने को मिला।
क्यों टूटा शेयर बाजार?
विश्लेषकों का मानना है कि बाजार में आई गिरावट के पीछे कई घरेलू और वैश्विक कारण जिम्मेदार हैं।
मुख्य कारण—
- विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली।
- वैश्विक बाजारों में कमजोरी।
- आईटी और बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में दबाव।
- निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली (Profit Booking)।
- वैश्विक व्यापार और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता।
इन्हीं कारणों से निवेशकों ने जोखिम वाले शेयरों में बिकवाली बढ़ा दी।
किन सेक्टरों में सबसे ज्यादा गिरावट?
आज के कारोबार में कई प्रमुख सेक्टर लाल निशान में बंद हुए।
सबसे अधिक दबाव रहा—
- बैंकिंग सेक्टर
- आईटी कंपनियां
- ऑटो सेक्टर
- मेटल शेयर
- रियल एस्टेट
- फाइनेंशियल सर्विसेज
हालांकि कुछ डिफेंसिव सेक्टरों में सीमित गिरावट देखने को मिली।
निवेशकों को कितना नुकसान?
शेयर बाजार में आई इस गिरावट के चलते बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों के मार्केट कैपिटलाइजेशन में लगभग ₹3 लाख करोड़ की कमी दर्ज की गई।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह नुकसान बाजार मूल्य (Market Value) में उतार-चढ़ाव के कारण है और लंबी अवधि के निवेशकों को घबराकर निर्णय नहीं लेना चाहिए।
विशेषज्ञों की क्या सलाह?
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि बाजार में इस तरह की गिरावट सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होती है।
उनकी सलाह—
- घबराकर शेयर न बेचें।
- लंबी अवधि की निवेश रणनीति अपनाएं।
- मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों पर ध्यान दें।
- पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखें।
- SIP निवेश जारी रखें।
विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत कंपनियां लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न दे सकती हैं।
निवेशकों को किन बातों पर नजर रखनी चाहिए?
आने वाले दिनों में निवेशकों को निम्नलिखित बातों पर ध्यान देना चाहिए—
- विदेशी निवेशकों की गतिविधियां।
- कंपनियों के तिमाही नतीजे।
- वैश्विक बाजारों का रुख।
- अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियां।
- कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें।
- रुपये की स्थिति।
इन कारकों का भारतीय शेयर बाजार पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है।
आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल?
विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले कुछ कारोबारी सत्रों में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। यदि वैश्विक संकेत सुधरते हैं और विदेशी निवेशकों की बिकवाली कम होती है, तो बाजार में रिकवरी देखने को मिल सकती है।
लंबी अवधि के निवेशकों के लिए गुणवत्ता वाले शेयरों में निवेश के अवसर भी बन सकते हैं।
निष्कर्ष
सेंसेक्स में 700 अंकों से अधिक की गिरावट ने एक बार फिर निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि बाजार विशेषज्ञ इसे सामान्य करेक्शन मान रहे हैं और निवेशकों को धैर्य बनाए रखने की सलाह दे रहे हैं। आने वाले दिनों में वैश्विक संकेत और कॉर्पोरेट नतीजे बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
FAQs
Q1. आज शेयर बाजार क्यों गिरा?
वैश्विक बाजारों की कमजोरी, FII बिकवाली, बैंकिंग और आईटी शेयरों में गिरावट के कारण बाजार में दबाव बना।
Q2. सेंसेक्स में कितनी गिरावट आई?
कारोबार के दौरान सेंसेक्स 700 अंकों से अधिक गिर गया।
Q3. निवेशकों को कितना नुकसान हुआ?
बाजार पूंजीकरण में लगभग ₹3 लाख करोड़ की कमी दर्ज की गई।
Q4. क्या अभी निवेश करना सही रहेगा?
विशेषज्ञ लंबी अवधि के निवेशकों को मजबूत कंपनियों में चरणबद्ध निवेश की सलाह देते हैं।
Q5. आगे बाजार की दिशा क्या हो सकती है?
वैश्विक संकेत, विदेशी निवेश और कंपनियों के तिमाही नतीजों के आधार पर बाजार की चाल तय होगी।