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New Delhi | ABRNEWS247

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि बिना मजिस्ट्रेट के वैध आदेश के केवल धारा 107 बीएनएसएस (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita) का हवाला देकर बैंक खातों को फ्रीज़ या अटैच करना कानूनी रूप से उचित नहीं है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि बैंक खाते को डेबिट-फ्रीज़ या अटैच करना नागरिक के वित्तीय अधिकारों को सीधे प्रभावित करता है, इसलिए ऐसी कार्रवाई कानून के निर्धारित प्रावधानों और प्रक्रिया का पालन किए बिना नहीं की जा सकती।


अदालत की मुख्य टिप्पणी

पीठ ने कहा कि:

  • किसी भी व्यक्ति के बैंक खाते पर रोक लगाने के लिए विधि द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है।
  • केवल एहतियाती प्रावधानों का हवाला देकर खाते को फ्रीज़ करना उचित नहीं माना जा सकता।
  • यदि किसी जांच एजेंसी को खाते पर कार्रवाई करनी है, तो सक्षम मजिस्ट्रेट से उचित आदेश प्राप्त करना आवश्यक है।

क्या है कानूनी संदर्भ?

धारा 107 बीएनएसएस का उद्देश्य शांति बनाए रखने से संबंधित निवारक कार्रवाई से जुड़ा है। अदालत ने संकेत दिया कि इस धारा का उपयोग सीधे वित्तीय संपत्तियों को फ्रीज़ करने के लिए नहीं किया जा सकता, जब तक कि विधिक प्रक्रिया पूरी न की जाए।


नागरिकों और व्यवसायों पर प्रभाव

यह फैसला उन व्यक्तियों और व्यवसायों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जिनके बैंक खाते जांच के दौरान अस्थायी रूप से फ्रीज़ किए जाते हैं। अदालत ने कहा कि वित्तीय लेनदेन पर रोक लगाने से पहले उचित न्यायिक निगरानी आवश्यक है।


आगे की स्थिति

अदालत के आदेश के बाद संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि वे कानूनी प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करें। इस निर्णय को वित्तीय अधिकारों और विधिक प्रक्रिया के संदर्भ में एक अहम स्पष्टीकरण के रूप में देखा जा रहा है।

Delhi High Court Bank Account Freeze Order